ग्राम सोठी में गढ़ेवाल परिवार ने रचा इतिहास – मृत्यु संस्कार में मीठा और नशापान पर लगाया पूर्ण प्रतिबंध

ग्राम सोठी में गढ़ेवाल परिवार ने रचा इतिहास – मृत्यु संस्कार में मीठा और नशापान पर लगाया पूर्ण प्रतिबंध
ग्राम सोठी, 07 अगस्त 2025 — समाज में बदलाव की मिसाल पेश करते हुए ग्राम सोठी के प्रतिष्ठित गढ़ेवाल परिवार ने अपने परिजन स्व. नंदकिशोर गढ़ेवाल के मृत्यु संस्कार और श्रद्धांजलि कार्यक्रम में मीठा भोजन और नशापान पर पूर्ण प्रतिबंध लगाकर नया इतिहास रच दिया। यह ग्राम सोठी का पहला मृत्यु संस्कार कार्यक्रम है, जिसमें न तो कोई मीठा पकवान बनाया गया और न ही परोसा गया।

जानकारी के अनुसार, स्व. नंदकिशोर गढ़ेवाल (पुत्र – सम्माननीय गरीबदास गढ़ेवाल) का आकस्मिक निधन 28 जुलाई 2025 को हुआ था। मिट्टी कार्यक्रम के अवसर पर सूर्यवंशी समाज सुधार संगठन के पदाधिकारियों ने समाज संविधान में वर्णित मृत्यु संस्कार संबंधी नियमों की जानकारी देते हुए मीठा भोज और नशापान पर प्रतिबंध की अपील की, जिसे परिवार ने सहर्ष स्वीकार किया।
तीजकर्म के दिन भी संगठन ने शोकाकुल परिवार से सादा भोजन रखने और मीठा व नशापान पूरी तरह बंद करने का आग्रह किया। परिवार ने न केवल इस निर्णय पर सहमति जताई, बल्कि रिश्तेदारों को फोन और शोक पत्र के माध्यम से यह संदेश भी दिया कि कार्यक्रम में कोई मीठा आइटम या नशापान न लाया जाए।

आज 7 अगस्त को आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम पूरी सादगी से संपन्न हुआ। कार्यक्रम में उपस्थित किसी भी व्यक्ति ने न मीठा लाया, न खाया, और न ही किसी प्रकार का नशापान किया। इस ऐतिहासिक पहल के लिए भाई लोकनाथ गढ़ेवाल को विशेष रूप से सराहा गया, जिन्होंने अपने परिवार को इस परिवर्तन के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम में बौद्ध भिक्षु भंते धम्मघोष ने त्रिरत्न और पंचशील का पाठ कर श्रद्धांजलि अर्पित की तथा शोकाकुल परिवार को शांति और सदाचार से जीवन यापन करने की शिक्षा दी। संगठन के अध्यक्ष प्रदीप कुमार चंद्राकर ने शराब जैसी सामाजिक बुराईयों के नुकसान पर प्रकाश डालते हुए समाज से इन्हें समाप्त करने की अपील की। इसके अलावा, परशुराम लटियार और भागवत खरसन ने भी अपने विचार रखे और गढ़ेवाल परिवार की सराहना की।

सूर्यवंशी समाज सुधार संगठन ने कहा – “समाज में नियम बनाने वाले पदाधिकारी भी जहां कई बार पालन नहीं करते, वहां सामान्य सदस्यों द्वारा इस तरह नियमों का पालन करना परिवर्तन की दिशा में बड़ा कदम है।”
गढ़ेवाल परिवार के इस साहसिक और अनुकरणीय कदम से उम्मीद है कि समाज में सकारात्मक बदलाव की लहर दौड़ेगी।



